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रिम्स-2 विवाद: नगड़ी की जमीन, विस्थापन और ग्रामीणों का विरोध आंदोलन – पूरी कहानी

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रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 (Rajendra Institute of Medical Sciences का प्रस्तावित विस्तार/नया परिसर) परियोजना पिछले कई वर्षों से राज्य का सबसे बड़ा भूमि विवाद बन चुकी है। यह मामला केवल एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल निर्माण का नहीं, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन, विस्थापन, मुआवजा, रोजगार और नीति-निर्णय की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ गंभीर सामाजिक-राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

रिम्स-2 क्या है और प्रस्ताव क्यों आया?

Rajendra Institute of Medical Sciences (RIMS) झारखंड का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहाँ पहले से ही मरीजों का भारी दबाव रहता है।

इसी कारण सरकार ने रिम्स-2 नाम से एक नया मेडिकल संस्थान/विस्तार परियोजना प्रस्तावित किया, ताकि:

  • मरीजों का बोझ कम हो
  • आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं बढ़ें
  • मेडिकल शिक्षा का विस्तार हो

इसके लिए रांची के नगड़ी (Nagri) क्षेत्र की जमीन को चिन्हित किया गया, जो उपजाऊ कृषि भूमि है।

नगड़ी की जमीन क्यों बनी विवाद का केंद्र?

नगड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि:

  • यह जमीन उनकी जीविका का मुख्य आधार है
  • यह पूरी तरह उपजाऊ कृषि भूमि है
  • बिना सही प्रक्रिया के भूमि अधिग्रहण का आरोप है
  • उचित मुआवजा और पुनर्वास नीति स्पष्ट नहीं है

ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता की कमी है, और कई दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से समय-समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि प्रक्रिया नियमानुसार है।

हालिया बड़ा आंदोलन: पैदल मार्च और पुलिस से टकराव

गुरुवार को गुलाम रब्बानी के नेतृत्व में नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

आंदोलन की प्रमुख घटनाएं:

  • ग्रामीणों ने नगड़ी से पैदल शांति मार्च शुरू किया
  • मार्ग: लॉ यूनिवर्सिटी – कांके चौक होते हुए आगे बढ़े
  • उद्देश्य: मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर सीधे वार्ता

लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रूट डायवर्ट किया:

  • बाजार टांड़ के पास मार्ग बदला गया
  • बोड़ेया रोड से मोराबादी जाने को कहा गया

ग्रामीणों की रणनीति (अचानक बदला रास्ता)

पुलिस को चकमा देकर ग्रामीण:

  • खेतों की पगडंडियों से आगे बढ़े
  • दो नदियों को पार किया
  • चौड़ी बस्ती होते हुए मोराबादी पहुंचे

यह घटनाक्रम प्रशासन के लिए अप्रत्याशित रहा।

ऑक्सीजन पार्क के पास रोका गया प्रदर्शन

मोराबादी पहुंचने के बाद जब ग्रामीण मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे, तो:

  • Morarabadi स्थित ऑक्सीजन पार्क के पास भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग की
  • ग्रामीणों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया
  • इसी दौरान रांची में बारिश शुरू हो गई
  • धीरे-धीरे भीड़ बिखरने लगी

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी शर्तें हैं:

1. मुआवजे की मांग

भूमि अधिग्रहण का उचित और पारदर्शी मुआवजा दिया जाए

2. रोजगार की गारंटी

विस्थापित परिवारों को उनकी योग्यता के अनुसार

  • सरकारी नौकरी
  • या स्वरोजगार अवसर

3. सीएम से सीधी बातचीत

ग्रामीणों ने मांग की कि मुख्यमंत्री Hemant Soren स्वयं उनसे एक बार सीधे मिलें

4. भूमि अधिग्रहण की जांच

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, इसकी जांच हो

प्रशासन और सरकार का पक्ष (स्थिति)

सरकारी स्तर पर पहले यह कहा जाता रहा है कि:

  • परियोजना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के लिए आवश्यक है
  • भूमि अधिग्रहण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है
  • प्रभावित लोगों के पुनर्वास का प्रावधान होगा

हालांकि, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद की कमी को इस विवाद की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।

विवाद की जड़: विकास बनाम विस्थापन

रिम्स-2 विवाद अब केवल भूमि का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह तीन बड़े सवालों पर केंद्रित हो गया है:

  • क्या विकास के लिए उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण सही है?
  • क्या विस्थापित किसानों को पर्याप्त मुआवजा और रोजगार मिल रहा है?
  • क्या नीति निर्माण में स्थानीय लोगों की भागीदारी पर्याप्त है?

निष्कर्ष

रिम्स-2 परियोजना झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन नगड़ी के ग्रामीणों का आंदोलन यह दिखाता है कि विकास परियोजनाओं में स्थानीय सहमति, पारदर्शिता और पुनर्वास नीति उतनी ही जरूरी है जितनी खुद परियोजना।

यदि सरकार और ग्रामीणों के बीच प्रभावी संवाद नहीं होता है, तो यह विवाद आगे भी राजनीतिक और सामाजिक रूप से और गहरा सकता है।

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