पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के द्वारा समाहरणालय पाकुड़ के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
पचुवाड़ा उत्तर एवं मध्य कोयला खदान परियोजना से प्रभावित रैयतों और ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के बैनर तले समाहरणालय, पाकुड़ के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन 05 जून 2026 से शुरू हुआ है और मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर लगाए गए पोस्टर के अनुसार, यह आंदोलन पचुवाड़ा उत्तर एवं मध्य कोयला खदान परियोजना में शामिल सरकारी कंपनियों WBPDCL (West Bengal Power Development Corporation Limited) और PSPCL (Punjab State Power Corporation Limited) द्वारा कथित रूप से अवैध एवं गैर-कानूनी तरीके से किए जा रहे खनन कार्यों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
पचुवाड़ा क्षेत्र में वर्षों से कोयला खनन कार्य संचालित हो रहा है। खनन परियोजना के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों की कृषि भूमि अधिग्रहित हुई है तथा कई गांवों को विस्थापन की समस्या का सामना करना पड़ा है। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे से संबंधित कई वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं।
विस्थापित मोर्चा का कहना है कि प्रभावित परिवारों को न तो उचित बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा मिला है और न ही सभी पात्र लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
धरना दे रहे ग्रामीणों ने अपनी 11 सूत्री मांगें प्रशासन और सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं—
1. बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा
मोर्चा की मांग है कि भूमि अधिग्रहण कानून RFCTLARR Act 2013 के प्रावधानों के अनुसार किसानों को उनकी भूमि का चार गुना बाजार मूल्य दिया जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है।
2. विधिवत भूमि अधिग्रहण
ग्रामीणों का आरोप है कि PSPCL और WBPDCL के लिए आज तक विधिवत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण भारत सरकार की जिम्मेदारी है और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना खनन कार्य जारी रखा गया है।
3. खनन लीज की समीक्षा
मोर्चा का दावा है कि सरकारी कंपनियों को दिए गए खनन लीज में कई कानूनी विसंगतियां हैं। इसलिए राज्य सरकार द्वारा दिए गए खनन लीज को रद्द करने की मांग की जा रही है।
4. प्रभावित परिवारों को रोजगार
आंदोलनकारियों की मांग है कि सभी रैयत परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी अथवा स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
5. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता
खनन, कोयला परिवहन और अन्य संबंधित कार्यों का आवंटन प्रभावित रैयतों और स्थानीय लोगों को किया जाए ताकि क्षेत्र के लोगों को आर्थिक लाभ मिल सके।
6. खनन कार्य पर रोक
मोर्चा ने मांग की है कि जब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कोयला खनन और विस्फोटक लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
7. पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन
कटलाईडीह सहित प्रभावित गांवों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पुनर्वास और पुनर्स्थापन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुनर्निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए।
8. श्रमिकों को निर्धारित वेतन
खनन ठेकेदारों और एमडीओ (Mine Developer and Operator) के यहां कार्यरत सभी श्रमिकों को हाई पावर कमेटी (HPC) द्वारा निर्धारित वेतनमान लागू करने की मांग की गई है।
9. डंप भूमि का समतलीकरण
ओवरबर्डन डंप (खनन से निकली मिट्टी-पत्थर) की भूमि को समतल कर मूल रैयतों को वापस सौंपने की मांग की गई है।
10. आजीवन मूलभूत सुविधाएं
प्रभावित परिवारों के लिए मुफ्त बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की आजीवन व्यवस्था की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
खनन और कोयला परिवहन रोकने की चेतावनी
मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक खनन कार्य और कोयला परिवहन को बंद रखा जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में रहेगा, लेकिन यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रशासन की नजर आंदोलन पर
समाहरणालय के समक्ष शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है। बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण, किसान और विस्थापित परिवार आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक प्रभाव
पचुवाड़ा कोयला खदान से जुड़ा यह आंदोलन केवल मुआवजे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भूमि अधिकार, विस्थापन, पुनर्वास और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी उठा रहा है। यदि सरकार और कंपनियों द्वारा जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा का यह अनिश्चितकालीन धरना झारखंड में भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और खनन परियोजनाओं से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों को फिर से केंद्र में ले आया है। प्रभावित ग्रामीण उचित मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और कानूनी प्रक्रिया के पालन की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकालते हैं और प्रभावित परिवारों को कितना न्याय दिला पाते हैं।