क्या लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ केवल पर्यटन स्थल है या धार्मिक आस्था का केंद्र? जानिए धार्मिक और पर्यटन स्थलों का अंतर, पारसनाथ (मरांग बुरु) की वास्तविक श्रेणी क्या है?

क्या लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ केवल पर्यटन स्थल है या धार्मिक आस्था का केंद्र? 2026 Thumbnail

क्या लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ पर्यटन स्थल है या धार्मिक स्थल? बोकारो में पर्यटन विकास की नई पहल के बीच उठे महत्वपूर्ण सवाल

बोकारो जिले में पर्यटन को नई पहचान देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यटन संवर्धन परिषद (DTPC) की बैठक के बाद एक महत्वपूर्ण बहस सामने आई है। बैठक में लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़, तेनुघाट डैम, गरगा डैम, भैरवनाथ धाम और चेचका धाम सहित कई स्थलों के विकास पर चर्चा हुई। इसके साथ ही यह प्रश्न भी उठने लगा है कि क्या लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ और पारसनाथ पहाड़ (मरांग बुरु) को केवल पर्यटन स्थल के रूप में देखा जाना चाहिए या इन्हें धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत स्थलों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

धार्मिक स्थल और पर्यटन स्थल में अंतर

धार्मिक स्थल (Religious / Pilgrimage Site)

ऐसे स्थान जहां लोगों की आस्था, पूजा-पद्धति, परंपरा और आध्यात्मिक विश्वास जुड़े होते हैं। यहां आने का उद्देश्य मनोरंजन नहीं बल्कि श्रद्धा, पूजा, दर्शन, अनुष्ठान या आध्यात्मिक साधना होता है।

उदाहरण:

  1. भैरवनाथ धाम – चंद्रपुरा प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  2. चेचका धाम – चेचका गांव, पेटरवार प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  3. खूंटा बाबा धाम – गोमिया प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  4. जलेश्वरी धाम – कसमार प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  5. लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ – ललपनिया, गोमिया प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  6. पारसनाथ पहाड़ (जैन तीर्थ सम्मेद शिखर) – गिरिडीह जिला, झारखंड

पर्यटन स्थल (Tourist Sites)

पर्यटन स्थल वे स्थान होते हैं जहां लोग प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व, मनोरंजन, साहसिक गतिविधियों या अवकाश बिताने के उद्देश्य से जाते हैं।

उदाहरण:

  1. तेनुघाट डैम – तेनुघाट, बेरमो (बोकारो), झारखंड
  2. गरगा डैम – बोकारो स्टील सिटी, बोकारो, झारखंड
  3. सिटी पार्क बोकारो – सेक्टर-5, बोकारो स्टील सिटी, झारखंड
  4. जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान – सेक्टर-4, बोकारो स्टील सिटी, झारखंड
  5. कोनार डैम – कोनार नदी, गोमिया प्रखंड, बोकारो, झारखंड
  6. दलाही कुंड – दलाही क्षेत्र, गोमिया प्रखंड, बोकारो, झारखंड

क्या धार्मिक स्थल पर्यटन स्थल भी बन सकते हैं?

लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ झारखंड
लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ झारखंड

हाँ। आधुनिक पर्यटन नीति में कई धार्मिक स्थलों को धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) या तीर्थ पर्यटन (Pilgrimage Tourism) की श्रेणी में रखा जाता है। काशी विश्वनाथ, वैष्णो देवी, तिरुपति बालाजी और देवघर इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये मूल रूप से धार्मिक स्थल हैं, लेकिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आने के कारण इन्हें धार्मिक पर्यटन स्थल भी कहा जाता है।

लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ झारखंड के संताल समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आस्थाओं में से एक माना जाता है। संताल समाज के लिए यह केवल एक पहाड़ी या दर्शनीय स्थान नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक परंपरा और सामुदायिक विरासत का प्रतीक है।

यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला लुगुबुरु महोत्सव देश-विदेश से श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को आकर्षित करता है। इसलिए इसकी मूल श्रेणी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत स्थल की है।

पारसनाथ पहाड़ (मरांग बुरु) किस श्रेणी में आता है?

पारसनाथ पहाड़ (मरांग बुरु) झारखंड
पारसनाथ पहाड़ (मरांग बुरु)

पारसनाथ पहाड़, जिसे जैन धर्म में सम्मेद शिखर कहा जाता है, विश्व के सबसे पवित्र जैन तीर्थों में गिना जाता है। मान्यता है कि 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने यहां मोक्ष प्राप्त किया। इसलिए जैन समाज के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

दूसरी ओर, झारखंड के कई आदिवासी समुदाय, विशेषकर संताल समाज, इसे मरांग बुरु (महान पर्वत) के रूप में अपनी पारंपरिक आस्था से जोड़ते हैं।

पारसनाथ को केवल पर्यटन स्थल कहना पर्याप्त नहीं है।

इसकी प्राथमिक पहचान धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल की है। पर्यटन गतिविधियाँ यहां मौजूद हैं, इसलिए इसे धार्मिक पर्यटन स्थल कहना अधिक उचित होगा।

बोकारो में पर्यटन विकास की नई पहल

उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई DTPC बैठक में बोकारो को केवल औद्योगिक जिला नहीं, बल्कि प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया गया। प्रथम चरण में पांच प्रमुख स्थलों के विकास पर जोर दिया गया:

प्राथमिकता वाले स्थल

  1. लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़
  2. तेनुघाट डैम
  3. गरगा डैम
  4. भैरवनाथ धाम
  5. चेचका धाम

इन स्थलों पर सड़क, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है।

पर्यटन प्रचार में सोशल मीडिया की भूमिका

बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के पर्यटन स्थलों के वीडियो, फोटो, ऐतिहासिक जानकारी और यात्रा मार्गदर्शिका को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रचारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य और देश के अन्य हिस्सों से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना है।

योगेन्द्र प्रसाद का प्रस्ताव: धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का समग्र विकास

योगेन्द्र प्रसाद का प्रस्ताव
योगेन्द्र प्रसाद का प्रस्ताव
योगेन्द्र प्रसाद का प्रस्ताव
योगेन्द्र प्रसाद का प्रस्ताव

झारखंड सरकार के मंत्री योगेन्द्र प्रसाद ने 4 जून 2026 को उपायुक्त बोकारो को पत्र लिखकर गोमिया विधानसभा क्षेत्र के धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के स्थलों के विकास का प्रस्ताव रखा। प्रमुख बिंदु थे:

  1. तेनुघाट डैम को पतरातु डैम की तर्ज पर विकसित करना
  2. वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर गतिविधियों की शुरुआत
  3. लुगुबुरु संग्रहालय को शीघ्र चालू करना
  4. विश्व पर्यटन दिवस पर साहसिक गतिविधियों का आयोजन
  5. त्रिलोकी धाम (तिरला) को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना
  6. खूंटा बाबा धाम का विकास
  7. बुढ़ा बाबा थान को पर्यटक सूची में शामिल करना
  8. दुर्गा पहाड़ी, मृगी खोह और सेवाती घाटी का पर्यटन विकास
  9. राम-लखन टुंगरी को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना

नये पर्यटक स्थलों की प्रस्तावित सूची (DTPC बैठक, 05 जून 2026)

नये पर्यटक स्थलों की प्रस्तावित सूची
नये पर्यटक स्थलों की प्रस्तावित सूची

जिला पर्यटन संवर्धन परिषद (DTPC) की बैठक में बोकारो जिले के विभिन्न प्रखंडों से प्राप्त अनुशंसाओं के आधार पर निम्नलिखित नए स्थलों को पर्यटन सूची में शामिल करने पर विचार किया गया:

क्र.सं. स्थल का नाम प्रखंड / स्थान
1 अमृत कुंभ धाम ग्राम- गायछंदा, चास
2 बोआडूंगरी भरारी पहाड़ ग्राम- साड़बौआ, चंदनकियारी
3 हथिया पत्थर पेटरवार
4 बारूनी घाट चास
5 बरूवाघाट (दामोदर नदी क्षेत्र) चन्द्रपुरा
6 फुलझरना मेला स्थल चांदो पंचायत, पेटरवार
7 शिव मंदिर अरायू पंचायत, ठाकुर टोला, जरीडीह
8 जलेश्वरी धाम भेंडरा पंचायत, नावाडीह
9 शिवधाम पोटसो पंचायत, नावाडीह
10 दुर्गा धाम तेलो पश्चिमी पंचायत, चन्द्रपुरा
11 त्रिलोकी धाम (तिरला धाम) गोमिया
12 खूंटा बाबा धाम पेटरवार
13 120 फीट बजरंगी बली मंदिर चन्द्रपुरा
14 भगवान परशुराम मंदिर साड़बौआ पंचायत, चंदनकियारी
15 भगवान परशुराम मंदिर खामार बेंदी पंचायत, चंदनकियारी

धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल

  1. अमृत कुंभ धाम (चास)
  2. शिव मंदिर, अरायू (जरीडीह)
  3. जलेश्वरी धाम (नावाडीह)
  4. शिवधाम (नावाडीह)
  5. दुर्गा धाम (चन्द्रपुरा)
  6. त्रिलोकी धाम (गोमिया)
  7. खूंटा बाबा धाम (पेटरवार)
  8. 120 फीट बजरंगी बली मंदिर (चन्द्रपुरा)
  9. भगवान परशुराम मंदिर (साड़बौआ)
  10. भगवान परशुराम मंदिर (खामार बेंदी)

प्राकृतिक एवं ग्रामीण पर्यटन स्थल

  1. बोआडूंगरी भरारी पहाड़ (चंदनकियारी)
  2. हथिया पत्थर (पेटरवार)
  3. बारूनी घाट (चास)
  4. बरूवाघाट दामोदर नदी क्षेत्र (चन्द्रपुरा)
  5. फुलझरना मेला स्थल (पेटरवार)

इन प्रस्तावित स्थलों को पर्यटन सूची में शामिल किए जाने के बाद इनके विकास, आधारभूत सुविधाओं, सड़क संपर्क, साइनेज, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं के लिए योजनाएं तैयार की जा सकती हैं। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाएँ प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो बोकारो आने वाले वर्षों में झारखंड के प्रमुख पर्यटन जिलों में शामिल हो सकता है। पर्यटन गतिविधियों से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त है:

लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ और पारसनाथ जैसे स्थलों के विकास में उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विकास ऐसा हो जो आस्था, परंपरा और स्थानीय समुदायों की भावनाओं का सम्मान करे।

निष्कर्ष

बोकारो में पर्यटन विकास की नई पहल निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। तेनुघाट डैम, गरगा डैम, कोनार डैम और अन्य प्राकृतिक स्थलों के विकास से जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़, भैरवनाथ धाम, चेचका धाम और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी।

लेकिन यह याद रखना होगा कि लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ और पारसनाथ जैसे स्थल केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं। ये करोड़ों लोगों की आस्था, पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं। इसलिए इनका विकास "पर्यटन परियोजना" के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत संरक्षण आधारित समग्र विकास मॉडल के तहत किया जाना चाहिए।

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