चंदनकियारी की बेटी बबीता हेम्ब्रम को मिलेगा प्रतिष्ठित बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार
झारखंड, संथाल समाज और लोक संस्कृति के लिए गौरव का क्षण
झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली चंदनकियारी प्रखंड के संथाल लाधला गांव की प्रतिभाशाली लोक कलाकार बबीता हेम्ब्रम का चयन प्रतिष्ठित बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। यह सम्मान भारत की सर्वोच्च सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक Sangeet Natak Akademi, नई दिल्ली द्वारा प्रदान किया जाता है।
बबीता हेम्ब्रम का यह चयन केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड, संथाल समाज और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती हैं।
कौन हैं बबीता हेम्ब्रम?
बबीता हेम्ब्रम बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड अंतर्गत संथाल लाधला गांव की रहने वाली हैं। बचपन से ही उन्हें संथाली लोकनृत्य और लोकसंगीत में गहरी रुचि रही है। उन्होंने अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर पारंपरिक कला को न केवल सीखा, बल्कि उसे संरक्षित और प्रचारित करने का भी कार्य किया।
व्यक्तिगत जानकारी
- नाम:बबीता हेम्ब्रम
- पिता का नाम:द्विजप्पद हेम्ब्रम
- जन्म तिथि:04 अप्रैल 2002
- राष्ट्रीयता:भारतीय
- भाषाएं:हिंदी, अंग्रेजी एवं संताली
- लिंग:महिला
- वैवाहिक स्थिति:अविवाहित
- धर्म:सरना
शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
बबीता हेम्ब्रम ने कला के साथ-साथ शिक्षा में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
| योग्यता | संस्थान/बोर्ड | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|
| मैट्रिक (10वीं) | जेएसी, रांची | 2018 | प्रथम श्रेणी |
| इंटरमीडिएट | जेएसी, रांची | 2020 | द्वितीय श्रेणी |
| स्नातक (बी.ए. इतिहास) | बीबीएमकेयू, धनबाद | 2023 | प्रथम श्रेणी |
| स्नातकोत्तर (एम.ए. संताली) | डीएसपीएमयू, रांची | 2024-2026 | अध्ययनरत |
कला के साथ-साथ शिक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बबीता हेम्ब्रम ने यह साबित किया है कि प्रतिभा और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता।
शिक्षा और संस्कृति दोनों क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियां युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
संथाली लोकनृत्य और लोकसंगीत की सच्ची साधक
बबीता हेम्ब्रम लंबे समय से संथाली संस्कृति की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। उन्होंने संथाल समाज के पारंपरिक नृत्यों और गीतों को मंचों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
वे विशेष रूप से निम्नलिखित सांस्कृतिक विधाओं से जुड़ी रही हैं—
- बाहा नृत्य
- सोहराय नृत्य
- डोंग नृत्य
- लांगरे नृत्य
- करम नृत्यरिंजा नृत्य
- रिंजा नृत्य
- पाता नृत्य
- दाहर नृत्य
- मातावार नृत्य
- दांता नृत्य
इन लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय मंचों पर शानदार प्रस्तुतियां
बबीता हेम्ब्रम ने विभिन्न महत्वपूर्ण आयोजनों में संथाली संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है।
जया मां भारतमू कार्यक्रम, कोलकाता (नवद्वीप धाम)
24 जुलाई 2024
- प्रस्तुति: बाहा एवं रिंजा नृत्य
गणतंत्र दिवस समारोह, कर्तव्य पथ, नई दिल्ली
26 जनवरी 2025
- प्रस्तुति: सोहराय एवं बाहा नृत्य
देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में प्रस्तुति देना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
SAAF स्पोर्ट्स फेस्टिवल, मोराबादी मैदान, रांची
24 अक्टूबर 2025
- प्रस्तुति: पाटा नृत्य
झारखंड स्थापना दिवस (रजत जयंती समारोह)
16 नवंबर 2025, रांची
- प्रस्तुति: बाहा नृत्य
मोंदाई महोत्सव, नवरंगपुर (ओडिशा)
13-14 दिसंबर 2025
- प्रस्तुति: बाहा, सोहराय, डोंग एवं लांगरे नृत्य
राष्ट्रीय पेसा दिवस, ऑडिटोरियम हाउस, रांची
24 दिसंबर 2025
- प्रस्तुति: सोहराय एवं दाहर नृत्य
इन कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुतियों को दर्शकों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों द्वारा काफी सराहा गया।
क्या है बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार?
बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार भारत के महान शहनाई वादक Ustad Bismillah Khan की स्मृति में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।
यह पुरस्कार Sangeet Natak Akademi द्वारा उन युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और पारंपरिक कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
पुरस्कार की विशेषताएं
- युवा कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान करता है।
- भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।
- लोक एवं जनजातीय कलाओं को मुख्यधारा से जोड़ता है।
- उभरते कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
- देश के सबसे सम्मानित युवा सांस्कृतिक पुरस्कारों में शामिल है।
डॉ. संजय की अनुशंसा बनी निर्णायक
छऊ केंद्र, चंदनकियारी के माननीय समन्वयक डॉ. संजय ने बबीता हेम्ब्रम की प्रतिभा, समर्पण और सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए उनके नाम की अनुशंसा की थी।
उनके चयन पर डॉ. संजय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा—
"बबीता हेम्ब्रम का चयन पूरे झारखंड और विशेष रूप से संथाल समुदाय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है।"
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
आज जब आधुनिकता के प्रभाव में कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं, ऐसे समय में बबीता हेम्ब्रम जैसी युवा कलाकारें अपनी संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहकर भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पहचान प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
संथाल लाधला गांव से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली बबीता हेम्ब्रम ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए उनका चयन न केवल उनकी कला-साधना का सम्मान है, बल्कि झारखंड की आदिवासी संस्कृति, लोककला और संथाल समाज की समृद्ध विरासत का भी राष्ट्रीय सम्मान है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा देती रहेगी।