महंगी LNG के बावजूद भारत ने बढ़ाया गैस आयात, अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर | LNG Import India 2026

महंगी गैस के बावजूद भारत ने बढ़ाया LNG आयात 2026 Thumbnail

गैस की बढ़ती मांग के बीच भारत ने कीमत नहीं, सप्लाई सिक्योरिटी को दी प्राथमिकता

कतर-यूएई से आपूर्ति बाधित होने पर अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाओं के कारण भारत को प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद भारत ने गैस की ऊंची कीमतों की चिंता किए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए गैस आयात बढ़ाया। मई 2026 में अमेरिका (US) भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर बनकर उभरा, जबकि परंपरागत रूप से सबसे बड़े सप्लायर कतर से एक भी LNG कार्गो भारत नहीं पहुंचा।

LNG क्या है?

LNG यानी Liquefied Natural Gas प्राकृतिक गैस का तरल रूप होता है। गैस को लगभग -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल बनाया जाता है, जिससे इसका आयतन काफी कम हो जाता है और इसे जहाजों के जरिए आसानी से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाया जा सकता है।

भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा आयातित LNG से पूरा करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से:

  • सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CNG और PNG)
  • उर्वरक (फर्टिलाइजर) उद्योग
  • बिजली उत्पादन
  • सिरेमिक और अन्य उद्योगों

में किया जाता है।

क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य और क्यों महत्वपूर्ण है?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और अन्य खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस के जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं।

भारत के कुल LNG आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।

कतर और UAE से आपूर्ति क्यों रुकी?

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावटों के कारण कतर और UAE से LNG आपूर्ति प्रभावित हुई। लगातार दूसरे महीने कतर से कोई LNG कार्गो भारत नहीं पहुंचा, जबकि UAE से केवल 0.1 मिलियन टन LNG ही आयात हुई।

ऐसी स्थिति में भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया और अमेरिका, नाइजीरिया, ओमान तथा अंगोला से अधिक LNG खरीदी।

मई 2026 में भारत का LNG आयात

Kpler के शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार भारत ने मई 2026 में 2.2 मिलियन टन LNG आयात की, जो:

  • अप्रैल की तुलना में 13.5% अधिक
  • मार्च की तुलना में 32% अधिक
  • मई 2025 की तुलना में 6% अधिक

रही।

यह दर्शाता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात बढ़ाया।

अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर

मई 2026 में अमेरिका से LNG आयात तीन गुना बढ़कर 0.9 मिलियन टन पहुंच गया, जो भारत के कुल LNG आयात का लगभग 41 प्रतिशत था।

देश मई 2026 (मिलियन टन) 2025 मासिक औसत
अमेरिका 0.9 0.2
नाइजीरिया 0.5 0.1
ओमान 0.3 0.2
अंगोला 0.3 0.1
UAE 0.1 0.3
कतर 0.0 1.0

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अमेरिका ने कतर की जगह लेते हुए भारत की गैस जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गैस इतनी महंगी क्यों हुई?

मार्च 2026 के अंत में एशियाई स्पॉट LNG कीमतें बढ़कर लगभग 25 डॉलर प्रति MMBtu तक पहुंच गई थीं। बाद में मई में कीमतें घटकर 17-18 डॉलर प्रति MMBtu पर आ गईं।

फिर भी यह स्तर संकट से पहले की कीमतों (लगभग 10 डॉलर प्रति MMBtu) से करीब 70 प्रतिशत अधिक था।

इसके बावजूद भारत ने LNG खरीद जारी रखी।

भारत ने कीमत से ज्यादा सप्लाई को क्यों महत्व दिया?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत के कई सेक्टरों में गैस की मांग ऐसी है जिसे आसानी से कम नहीं किया जा सकता।

1. सिटी गैस वितरण

घरों में PNG और वाहनों में CNG की मांग लगातार बनी रहती है।

2. उर्वरक उद्योग

भारत की खाद उत्पादन व्यवस्था प्राकृतिक गैस पर काफी हद तक निर्भर है।

3. बिजली क्षेत्र

मई 2026 में देश में भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

  • बिजली खपत में 11% से अधिक वृद्धि हुई।
  • पीक डिमांड 270 GW से ऊपर पहुंच गई।
  • गैस आधारित बिजली संयंत्रों को स्टैंडबाय पर रखा गया।

ऐसे में महंगी LNG भी बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक हो गई।

जापान और दक्षिण कोरिया से अलग रहा भारत का रुख

जब LNG की कीमतें बढ़ीं तो जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कई बड़े आयातकों ने गैस खरीद कम कर दी। लेकिन भारत ने इसके विपरीत रणनीति अपनाई।

भारत ने माना कि ऊर्जा की कमी अर्थव्यवस्था और आम जनता पर अधिक गंभीर प्रभाव डाल सकती है, इसलिए अतिरिक्त कीमत चुकाकर भी गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।

भारत के लिए क्या है बड़ा सबक?

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत को तीन महत्वपूर्ण सबक दिए हैं:

  • ऊर्जा स्रोतों में विविधता जरूरी :केवल कतर या खाड़ी देशों पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
  • दीर्घकालिक LNG समझौते महत्वपूर्ण :अमेरिका, अफ्रीका और अन्य देशों के साथ दीर्घकालिक गैस समझौते ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं।
  • घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता :आयात पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए घरेलू गैस उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है।

निष्कर्ष

मई 2026 में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कतर और UAE से आपूर्ति बाधित होने तथा LNG कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारत ने गैस आयात बढ़ाया और अमेरिका, नाइजीरिया, ओमान तथा अंगोला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की। यह रणनीति देश की बिजली, उर्वरक और गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

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