भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) का तेज़ी से विस्तार केवल सड़क, पुल और कंक्रीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे लाखों श्रमिकों की मेहनत छिपी हुई है। देश की हाईवे परियोजनाओं में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक आर्थिक रूप से पिछड़े और प्रवासन-प्रभावित क्षेत्रों से आते हैं।
इसी वास्तविकता को समझते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक महत्वपूर्ण स्किलिंग (Skilling Up) और प्रशिक्षण पहल की शुरुआत की है, जो भारत के 8 राज्यों के 49 ज़िलों से आने वाले श्रमिकों पर केंद्रित है।
यह पहल न केवल श्रमिकों के कौशल को उन्नत करेगी, बल्कि आजीविका सुरक्षा, आय स्थिरता और दीर्घकालिक रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।
8 राज्यों के 49 ज़िले: NHAI परियोजनाओं की रीढ़
NHAI के आकलन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों का बड़ा हिस्सा 49 ज़िलों से आता है, जो निम्नलिखित 8 राज्यों में स्थित हैं:
शामिल राज्य:
1. बिहार
2. छत्तीसगढ़
3. झारखंड
4. ओडिशा
5. पश्चिम बंगाल
6. उत्तर प्रदेश
7. मध्य प्रदेश
8. राजस्थान
इन राज्यों में:
- रोज़गार के सीमित अवसर
- उच्च प्रवासन दर
- अनौपचारिक और दैनिक मज़दूरी पर निर्भरता
जैसी समस्याएँ आम हैं। इन क्षेत्रों के श्रमिकों के पास व्यावहारिक अनुभव तो होता है, लेकिन औपचारिक प्रशिक्षण और प्रमाणन की कमी रहती है।
NHAI की यह पहल इसी अंतर को पाटने का प्रयास है।
हाईवे श्रमिकों की स्किलिंग क्यों ज़रूरी है?
भारत सरकार वर्तमान में रिकॉर्ड गति से सड़क निर्माण कर रही है, जैसे:
- भारतमाला परियोजना
- पीएम गति शक्ति
- राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)
लेकिन इस क्षेत्र में कुछ बड़ी चुनौतियाँ हैं:
- प्रशिक्षित तकनीकी श्रमिकों की कमी
- कार्यस्थल पर सुरक्षा जोखिम
- श्रमिकों का अधिक पलायन (High Attrition)
- करियर उन्नति के सीमित अवसर
स्किलिंग के माध्यम से NHAI का उद्देश्य है:
- निर्माण गुणवत्ता में सुधार
- श्रमिक सुरक्षा सुनिश्चित करना
- परियोजनाओं में देरी कम करना
- कुशल मानव संसाधन तैयार करना
NHAI की स्किलिंग-अप पहल की मुख्य विशेषताएँ
1. NHAI द्वारा Seed Fund (बीज निधि)
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है NHAI का वित्तीय नेतृत्व।
- NHAI प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए Seed Fund प्रदान करेगा
- यह निधि निम्न कार्यों में उपयोग होगी:
- प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना
- पाठ्यक्रम विकास
- शुरुआती संचालन लागत
इससे यह सुनिश्चित होता है कि स्किलिंग केवल निजी कंपनियों पर निर्भर न रहे, बल्कि इसमें सरकारी प्रतिबद्धता भी हो।
2. हाईवे बिल्डर्स द्वारा CSR फंड से योगदान
इस योजना को टिकाऊ और सहभागी बनाने के लिए:
- हाईवे निर्माण कंपनियाँ CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड से योगदान देंगी
- यह एक Public–Private Partnership मॉडल होगा
निर्माण कंपनियों को इससे लाभ:
- प्रशिक्षित श्रमिक उपलब्ध होंगे
- उत्पादकता बढ़ेगी
- सुरक्षा मानकों में सुधार होगा
यह पहल CSR को समाजोपयोगी निवेश में बदलती है।
3. अनुभवी श्रमिक बनेंगे Master Trainer
इस योजना की सबसे सशक्त विशेषता है मास्टर ट्रेनर मॉडल।
- 7–8 वर्षों का अनुभव रखने वाले श्रमिकों को:
- अपस्किल किया जाएगा
- प्रमाणित किया जाएगा
- मास्टर ट्रेनर के रूप में विकसित किया जाएगा
मास्टर ट्रेनर:
- नए श्रमिकों को प्रशिक्षण देंगे
- व्यावहारिक ज्ञान साझा करेंगे
- साइट पर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँगे
इससे:
- अनुभवी श्रमिकों को सम्मान और नेतृत्व मिलेगा
- ज्ञान का स्थानांतरण ज़मीनी स्तर पर होगा
4. प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड (भत्ता)
दैनिक मज़दूरी करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है प्रशिक्षण के दौरान आय का नुकसान।
इसको ध्यान में रखते हुए:
- प्रशिक्षण लेने वाले श्रमिकों को स्टाइपेंड दिया जाएगा
- इससे:
- दैनिक आय की क्षतिपूर्ति होगी
- प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ेगी
- ड्रॉप-आउट कम होंगे
यह कदम NHAI के श्रमिक-केन्द्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
लक्षित लाभार्थी कौन हैं?
यह योजना मुख्यतः निम्न श्रमिकों पर केंद्रित है:
- प्रवासी मज़दूर
- अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिक
- जिनका कार्यक्षेत्र:
- सड़क निर्माण
- मिट्टी कार्य (Earthwork)
- कंक्रीट कार्य
- मशीनरी सहायता
- रोड सेफ्टी
बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों के लिए यह योजना सम्मानजनक रोज़गार का मार्ग बन सकती है।
स्रोत ज़िलों पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
1. मजबूरी में पलायन में कमी
कौशल और बेहतर मज़दूरी से:
- अस्थायी प्रवासन घटेगा
- जीवन स्तर सुधरेगा
2. प्रमाणन और रोजगार गतिशीलता
प्रशिक्षण के बाद:
- श्रमिक बेहतर वेतन मांग सकेंगे
- देशभर में काम के अवसर मिलेंगे
3. वंचित समुदायों का सशक्तिकरण
इस योजना से:
- ST, SC और OBC समुदायों को लाभ
- सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि
राष्ट्रीय नीतियों से सामंजस्य
यह पहल निम्न राष्ट्रीय योजनाओं से मेल खाती है:
- Skill India Mission
- आत्मनिर्भर भारत
- मेक इन इंडिया (इन्फ्रास्ट्रक्चर फोकस)
- श्रमिक कल्याण सुधार
- SDGs (सतत विकास लक्ष्य)
चुनौतियाँ और आगे की राह
हालाँकि योजना प्रभावशाली है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ हैं:
- प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना
- पारदर्शी चयन प्रक्रिया
- CSR फंड का सही उपयोग
- दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित करना
इसके लिए NHAI, ठेकेदारों, राज्य सरकारों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है।
निष्कर्ष: सड़कें भी बनेंगी, भविष्य भी
NHAI की यह स्किलिंग योजना केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की सोच में बदलाव है।
8 राज्यों के 49 ज़िलों से आने वाले श्रमिकों को केंद्र में रखकर यह पहल यह सुनिश्चित करती है कि भारत की सड़कें केवल शहरों को नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को भी जोड़ें।
यह पहल साबित करती है कि जब विकास मानव-केन्द्रित होता है, तभी वह समावेशी और टिकाऊ बनता है।
.jpg)