जल जीवन मिशन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सख्त, हर घर तक नल से जल पहुंचाने का दिया निर्देश
झारखंड में जल संकट और स्वच्छ पेयजल की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाई जाए और समयबद्ध तरीके से हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जाए
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि:
- जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाते हुए हर घर तक नल से जल पहुंचाने का काम समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
- पेयजल संकट की संभावना वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी कर समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जाए।
- जलापूर्ति योजनाओं की real-time मॉनिटरिंग की जाए और निर्माणाधीन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा हो।
- राज्य की जल सहियाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं।
- वर्षा जल संचयन, रिचार्ज पिट और भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाई जाए।
- अनुपयोगी चापाकलों के बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पिट के रूप में किया जाए ताकि भू-जल स्तर बढ़ सके।
- हर आंगनबाड़ी केंद्र तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
- जल गुणवत्ता की नियमित जांच हो ताकि लोगों तक स्वच्छ और सुरक्षित पानी पहुंचे।
- प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं और अच्छा काम करने वाले गांवों को प्रोत्साहित किया जाए।
जल जीवन मिशन क्या है?
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। झारखंड सरकार इस योजना के तहत गांव-गांव पाइपलाइन बिछाकर घरों तक पानी पहुंचाने का काम कर रही है।
इसी अन्याय के खिलाफ बिरसा मुंडा ने "उलगुलान" यानी महान विद्रोह का बिगुल फूंका। देखते ही देखते हजारों मुंडा, उरांव और अन्य आदिवासी समुदायों के लोग उनके नेतृत्व में एकजुट हो गये।
जिन गांवों में पानी की समस्या है, वहां के लोग क्या करें?
अगर किसी गांव में पानी की गंभीर समस्या है या जल जीवन मिशन का काम अधूरा है, तो ग्रामीण निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
1. ग्रामसभा में मुद्दा उठाएं
- अपने गांव की ग्रामसभा में पेयजल समस्या को आधिकारिक रूप से उठाएं।
- ग्रामसभा की कार्यवाही में यह दर्ज कराएं कि गांव में पानी की समस्या है और समाधान की मांग की जा रही है।
2. पंचायत प्रतिनिधियों को आवेदन दें
- मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य को लिखित आवेदन दें।
- आवेदन में गांव का नाम, प्रभावित परिवारों की संख्या और पानी की समस्या का विवरण स्पष्ट लिखें।
3. प्रखंड कार्यालय (BDO) में शिकायत करें
- प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) को आवेदन दें।
- आवेदन की एक प्रति अपने पास रखें और प्राप्ति रसीद अवश्य लें।
4. जल जीवन मिशन की हेल्पलाइन और पोर्टल का उपयोग करें
ग्रामीण जल जीवन मिशन की शिकायत व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं:
- राज्य पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की हेल्पलाइन
- जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSC)
- ऑनलाइन शिकायत पोर्टल (यदि उपलब्ध हो)
4. जल जीवन मिशन की हेल्पलाइन और पोर्टल का उपयोग करें
यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है, तो:
- उपायुक्त (DC) को सामूहिक आवेदन दें।
- जनता दरबार, समाधान दिवस या ऑनलाइन जन शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- स्थानीय विधायक और सांसद को भी ज्ञापन सौंपा जा सकता है।
गांव में पानी की समस्या का स्थायी समाधान कैसे हो सकता है?
सरकार और ग्रामीणों के सहयोग से निम्न उपाय प्रभावी हो सकते हैं:
1. जल जीवन मिशन की पाइपलाइन योजना पूरी कराना
गांव में पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक और घर-घर नल कनेक्शन का काम तेजी से पूरा कराया जाए।
2. वर्षा जल संचयन
गांव के स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और घरों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए।
3. रिचार्ज पिट और सोख्ता निर्माण
अनुपयोगी चापाकलों और खाली जगहों पर रिचार्ज पिट बनाकर भू-जल स्तर बढ़ाया जा सकता है।
4. जल स्रोतों का संरक्षण
तालाब, कुआं, चापाकल और झरनों की सफाई एवं संरक्षण के लिए सामुदायिक अभियान चलाया जाए।
5. पानी की बर्बादी रोकें
गांव में जागरूकता अभियान चलाकर अनावश्यक पानी बहाने से रोकें और जल संरक्षण की आदत विकसित करें।
मुख्यमंत्री का संदेश: जल संरक्षण भी उतना ही जरूरी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि केवल पाइपलाइन बिछाना पर्याप्त नहीं है। भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और प्लास्टिक मुक्त गांव जैसे कदम भी जरूरी हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित रह सके।
निष्कर्ष
जल जीवन मिशन झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी उम्मीद है। सरकार ने अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन गांवों के लोगों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी गांव में पानी की समस्या है, तो ग्रामीण संगठित होकर ग्रामसभा, पंचायत, प्रखंड और जिला प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाएं। सामूहिक प्रयास से ही हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना संभव होगा।